क्या आपको पता है चाणक्य कि ये गुप्त बाते ?

दोस्तों, आज हम चाणक्य के बारे में जानेंगे. वैसे आप लोगो ने चाणक्य के बारे में जरूर सुना होगा, लेकिन आज हम उनके बारे में थोड़ा Short में जान लेते है.

chanakya biography

चाणक्य का जन्म- 371 bc

चाणक्य की मृत्यु – 283 bc

पिता का नाम- ऋषि चणक

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चाणक्य ने मगध के अत्याचारी शासक नन्द का विनाश करके, उसके स्थान पर मौर्य साम्राज्य की स्थापना की थी. उन्होंने अर्थशास्त्र जैसे राजनीतिक ग्रन्थ की रचना करके, संसार में अपना नाम अमर कर दिया.

चाणक्य कोन थे ?

चाणक्य का जीवन जन-कल्याण की भावना से ओत-प्रोत रहा है. वे महान आदर्शवादी, सामाजिक तथा राजनीतिक मर्यादाओ के प्रतिमूर्ति थे. आचार्य चाणक्य को “कौटिल्य” और “विष्णुगुप्त” के के नामो से भी जाना जाता है. चाणक्य के पिता का नाम चणक था. इसी कारण उनका “चाणक्य” नाम पड़ा. उनका वास्तविक नाम “विष्णुगुप्त” था.

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चाणक्य जाति से ब्राम्हण थे, मगध का राजा चाणक्य से घृणा करता था. उसने एक बार भरी सभा में चाणक्य का अपमान भी किया था. तभी से चाणक्य ने प्रतिज्ञा कर ली थी की वे मगध के राजा महानंद का विनाश करके ही अपनी चोटी में गाठ बाधेगे. इसके लिए उन्होंने अपने सबसे प्रिय शिष्य चन्द्रगुप्त को तैयार करना शुरू कर दिया था.

राजा नन्द कोन थे ?

इतिहासकारो का तो यहाँ तक मत है कि मगध के राजा नन्द ने चाणक्य के पिता चणक को मौत के घाट उतार दिया था. मगध का राजा नन्द अत्यंत अत्याचारी था. उसे प्रजा के सुख दुःख से कोई लेना-देना नहीं था. वह तो हमेशा सत्ता का गलत उपयोग करता था और हमेशा सत्ता के मद में चूर रहता था.

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भोग-विलाश को तो उसने दिनचर्या में शामिल कर लिया था. चाणक्य ने ऐसे दुष्ट व्यक्ति का वंश समेत विनाश करने की ठानी थी.

उन्होंने अपने कूटनीतिक दिमाग का इस्तेमाल करके मगध के राजा नन्द का विनाश करके ही अपनी छोटी में गाठ बाधी थी. उन्होंने नन्द का विनाश करके अपने शिष्य चन्द्रगुप्त मौर्य को सिंहासन पर बैठाया था और मौर्य साम्राज्य की स्थापना की थी. नन्द के विनाश में चन्द्रगुप्त का महत्वपूर्ण योगदान रहा था.

राजसत्ता प्राप्त करके भी चाणक्य को राजमोह कभी नहीं हुआ. चाणक्य महलो की वजाय महलो से दूर कुटिया बनाकर रहते थे. वही पर रहकर उन्होंने अपने सारे काम किये. चाणक्य हमेशा चन्द्रगुप्त मौर्य के साम्राज्य को दृढ बनाने के लिए प्रयासरत रहे.

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चाणक्य ने लिखे कई ग्रन्थ

चाणक्य ने अपने ग्रन्थ अर्थशास्त्र की की रचना भी उसी समय की थी. उन्होंने अपने ग्रन्थ में कई नीतिवाक्यो और सूत्रों का समाकलन किया है. उन्होंने अपने ग्रन्थ में जोश, तेज, द्रढ़ता, आत्मविश्वास और समाज के पुनरोत्थान से ओत-प्रोत नीतिवाक्यो को स्थान दिया है. जनमानस का इस प्रकार से मार्गदर्शन किया है कि कोई भी उनके ग्रंथो को पढ़कर कई गूढ़ रहस्यों को जान सकता है. उन्होंने इतिहास में एक मिसाल कायम कि है.

आचार्य चाणक्य के बारे में आज भी लोग जानने के लिए उत्सुक रहते है. चाणक्य ने अपने नीतिवाक्यो में ऐसी शिक्षा दी है कि जो आज भी लोगो को प्रेरित करती है. कहा जाता है कि जिन्होंने अर्थशाश्त्र का अध्यन नहीं किया, वो राजनीती का सफल सञ्चालन नहीं कर सकते.

दोस्तों आपको इससे चाणक्य के बारे में संक्षिप्त ज्ञान जरूर हुआ होगा. आप अपने सुझाव कमेंट के माध्यम से दे सकते है. इस पोस्ट को शेयर जरूर करे जिससे अन्य लोगो को भी चाणक्य के बारे में जानने का मौका मिले और हा हमारी प्रत्येक नई पोस्ट कि अपडेट अपने मोबाइल पर पाने के लिए हमे सब्सक्राइब करना न भूले.

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